न्हात बलकुंवर कुंवर गिरिधारी ।
जसुमति तिलक करत मुख चुंबत आरति नवल उतारी ॥
आनंद राय सहित गोप सब नंदरानी ब्रजनारी ।
जलसों घोर केसर कस्तूरी सुभग सीसतें ढारी ॥
बहोर करत श्रंगार सबे मिल सब मिल रहत निहारी ।
चंद्रावलि ब्रजमंगल रसभर श्रीवृषभान दुलारी ॥
मनभाये पकवान जिमावत जात सबें बलहारी ।
श्रीविट्ठलगिरिधरन सकल ब्रज सुख मानत छोटी दिवारी ॥











No comments
Comments feed for this article
Trackback link
http://blog.shubhamudgal.com/2005/12/track-2/trackback/