Shubh Deepavali - Track 2

न्हात बलकुंवर कुंवर गिरिधारी ।

जसुमति तिलक करत मुख चुंबत आरति नवल उतारी ॥

आनंद राय सहित गोप सब नंदरानी ब्रजनारी ।

जलसों घोर केसर कस्तूरी सुभग सीसतें ढारी ॥

बहोर करत श्रंगार सबे मिल सब मिल रहत निहारी ।

चंद्रावलि ब्रजमंगल रसभर श्रीवृषभान दुलारी ॥

मनभाये पकवान जिमावत जात सबें बलहारी ।

श्रीविट्ठलगिरिधरन सकल ब्रज सुख मानत छोटी दिवारी ॥